Thursday, 1 March 2012

mat ke baad

चुनाव के बाद के दिन बोरियत भरे होते हैं . हर तरफ कयास लगाये जा रहे हैं कि कौन सत्ता कि मंजिल तक पहुंचेगा और कौन निराश हो कर मन मसोस कर बैठेगा. आम जनता कि हालत ठीक कसाई के उस बकरे की तरह है जिसे यह इंतज़ार करना पड़ रहा है कि उसको हलाल कौन करेगा.
समाचार चैनेल्स भी कयासों से भरे हुए हैं और हर कोई अपने पिटारे से नई गडित पेश कर रहा है . हम जैसी आम जनता यह जानते हुए भी कि यह तथाकथित intelectuals कभी भी सही नहीं होते हैं क्योंकि drawing रूम से जनता के निर्णयों का कभी भी अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता है , फिर भी इन्हें घूर घूर कर अपनी आंखे फोड़े हुए हैं . यदि हम इन चर्चाओं का इतिहास उठा कर देखें तो पाएंगे कि इन चर्चाओं से मनोरंजन तो होता है परन्तु वास्तव में इनकी सत्य से उतनी ही दूरी है जितनी क़ी पाकिस्तान क़ी शांति से.
मुझे NDA सरकार का इलेक्शन याद आता है जब सभी बीजेपी कि हवा बता रहे थे और अपने MMS प्रधानमंत्री बन गए . UP में पिछली बार त्रिशंकु विधानसभा कि चर्चाएँ हो रही थी और मायावती पूर्ण बहुमत में आ गयी और मूर्तियाँ बना कर प्रदेश का उद्धार किया . इसलिए मित्रों , intellectuals को ज्यादा भाव न दे …अपने विवेक पर भरोसा रखें क्योंकि वोह भी हवा में तीर चला रहे हैं जैसे कि आप और हम .
जैसे हमारे दूधवाले और सब्जी वाले भी किसी राजनितिक दल पर तुक्का लगा रहे होते हैं वैसे ही हमारे खबरिया channels के पत्रकार . इसलिए तब तक चुनाव परिणाम का इंतज़ार करिए ..होली कि तैय्यारी करिए और हाँ ध्यान दीजिये किसी राजनातिक दल के लिए सर फुट्टवल मत करिए . पता नहीं किसकी सरकार बने.हवा का रुख कोई नहीं जानता . पत्रकार भी नहीं.

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